अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते तथा इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की कथित भूमिका को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के लिए एक झटका बताते हुए दावा किया कि इससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव के संकेत मिलते हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश सहित पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि यदि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद या समझौता प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, तो यह दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है। कांग्रेस का आरोप है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पारंपरिक संतुलित पश्चिम एशिया नीति से दूरी बनाई है, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्रीय समीकरणों में नई चुनौतियां सामने आई हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान, जिसे भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग करने का प्रयास करता रहा है, अब कुछ महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रक्रियाओं में सक्रिय दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से इस प्रकार की आलोचनाओं पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों, रणनीतिक स्वायत्तता और बहुपक्षीय सहयोग के सिद्धांतों पर आधारित है। हाल के वर्षों में भारत ने अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया, रूस और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक घटनाक्रम के आधार पर किसी देश के वैश्विक प्रभाव का पूर्ण आकलन करना उचित नहीं होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय संबंध अनेक कारकों से प्रभावित होते हैं। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के कारण क्षेत्रीय देशों की भूमिकाओं में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कांग्रेस की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में प्रयासों को वैश्विक स्तर पर सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। इस मुद्दे ने भारत में विदेश नीति को लेकर राजनीतिक बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-18 15:09:54