G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बातचीत में समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया भर के समुद्री क्षेत्र में लाखों भारतीय नाविक कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुचारू संचालन में भारतीय नाविकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, इसलिए उन्हें भय, असुरक्षा या किसी भी प्रकार की बाधा के बिना अपना कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बनी हुई है। भारत विश्व के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में से एक है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय जहाजों तथा समुद्री परिवहन क्षेत्र में कार्यरत हैं। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से संचालित होता है, इसलिए समुद्री सुरक्षा केवल आर्थिक विषय नहीं बल्कि मानवीय और रणनीतिक महत्व का भी मुद्दा है। प्रधानमंत्री ने सुरक्षित और निर्बाध समुद्री मार्गों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता के लिए समुद्री रास्तों का खुला और सुरक्षित रहना आवश्यक है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष का प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और समुद्री परिवहन पर पड़ सकता है। भारत लंबे समय से नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा का समर्थन करता रहा है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि जी7 मंच पर भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर भारत ने वैश्विक समुद्री समुदाय में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया है। यह बयान न केवल विदेश नीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि उन लाखों भारतीय परिवारों की चिंताओं को भी सामने लाता है जिनकी आजीविका समुद्री क्षेत्र से जुड़ी हुई है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-18 15:07:48