केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ओमान और गुजरात के बीच प्रस्तावित गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है। मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि हाल के दिनों में विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर ओमान से गुजरात तक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक समुद्र के भीतर पाइपलाइन परियोजना पर विचार किए जाने संबंधी दावे सामने आए थे, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रस्ताव न तो मंत्रालय के पास विचाराधीन है और न ही ऐसी किसी परियोजना को मंजूरी दी गई है। मंत्रालय के इस बयान के बाद उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें भारत और ओमान के बीच ऊर्जा सहयोग के तहत एक बड़े बुनियादी ढांचा परियोजना की संभावना जताई जा रही थी। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के साथ तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर लगातार काम कर रहा है। पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है और ओमान भी भारत का एक प्रमुख ऊर्जा साझेदार माना जाता है। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जिस विशेष गहरे समुद्री पाइपलाइन परियोजना की चर्चा की जा रही है, वह फिलहाल सरकारी एजेंडे का हिस्सा नहीं है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की समुद्री पाइपलाइन परियोजनाएं तकनीकी, वित्तीय और भू-राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत जटिल होती हैं तथा इनके लिए विस्तृत व्यवहार्यता अध्ययन, बहुपक्षीय समन्वय और बड़े निवेश की आवश्यकता होती है। भारत सरकार ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण, रणनीतिक भंडारण क्षमता बढ़ाने और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई अन्य परियोजनाओं पर काम कर रही है। मंत्रालय के स्पष्टीकरण से यह भी स्पष्ट हुआ है कि किसी भी बड़े ऊर्जा अवसंरचना परियोजना के संबंध में आधिकारिक घोषणा और अनुमोदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उसे सरकारी योजना का हिस्सा माना जाना चाहिए। फिलहाल ओमान-गुजरात गहरे समुद्री ऊर्जा पाइपलाइन से संबंधित दावों को मंत्रालय ने असत्य बताते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसी कोई परियोजना वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-17 16:14:52