अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवीनतम अनुमानों के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद वृद्धि में भारत दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता देश बनने जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भारत का योगदान 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो केवल चीन के 26.6 प्रतिशत योगदान से पीछे है। इस सूची में भारत ने अमेरिका, इंडोनेशिया, तुर्किये, सऊदी अरब, वियतनाम, ब्राजील, नाइजीरिया और जर्मनी जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ दिया है। आईएमएफ के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि वैश्विक आर्थिक विस्तार में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भारत इस परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। भारत की मजबूत घरेलू मांग, तेजी से बढ़ता निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार, विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचा विकास को इस प्रदर्शन के प्रमुख कारणों के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल नेटवर्क और औद्योगिक गलियारों जैसी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, बढ़ता उपभोक्ता बाजार और सुधार आधारित नीतियां देश को वैश्विक विकास का प्रमुख चालक बना रही हैं। सूची में चीन 26.6 प्रतिशत योगदान के साथ पहले स्थान पर है, जबकि अमेरिका 9.9 प्रतिशत योगदान के साथ तीसरे स्थान पर है। इंडोनेशिया, तुर्किये और सऊदी अरब जैसी अर्थव्यवस्थाएं भी वैश्विक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में हैं। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार भारत का 17 प्रतिशत योगदान यह दर्शाता है कि विश्व अर्थव्यवस्था की वृद्धि में देश की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यह उपलब्धि भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता, निवेश आकर्षण और वैश्विक आर्थिक महत्व को भी रेखांकित करती है। आने वाले वर्षों में यदि आर्थिक सुधार, औद्योगिक विस्तार और निवेश प्रवाह की गति बनी रहती है तो भारत वैश्विक विकास के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-17 16:24:07