भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने 2014 से अब तक 34 देशों के 390 से अधिक विदेशी उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इनमें सबसे अधिक 232 उपग्रह केवल अमेरिका के हैं, जो इसरो की वैश्विक विश्वसनीयता और वाणिज्यिक क्षमता को दर्शाता है। इसके बाद ब्रिटेन के 83, सिंगापुर के 19, कनाडा के 8, दक्षिण कोरिया के 5, जबकि जापान और इज़राइल के 2-2 उपग्रह शामिल हैं। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इसरो ने यह उपलब्धि अपने प्रक्षेपण यानों पीएसएलवी, एलएमवी3 और एसएसएलवी के जरिए वाणिज्यिक आधार पर हासिल की है। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्पेस मार्केट में भारत की बढ़ती साख का प्रमाण भी है। इसरो की कम लागत, उच्च सफलता दर और विश्वसनीय लॉन्च सेवाओं ने उसे कई विकसित और विकासशील देशों के लिए पसंदीदा लॉन्च पार्टनर बना दिया है। भारत ने धीरे-धीरे अंतरिक्ष सेवाओं के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है और अब वह केवल वैज्ञानिक मिशनों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े वैश्विक कमर्शियल लॉन्च प्रदाता के रूप में भी स्थापित हो चुका है। यह उपलब्धि भारत की स्पेस इकॉनमी, तकनीकी आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देती है। विदेशी उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण से भारत को विदेशी मुद्रा आय, तकनीकी साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा तीनों स्तरों पर लाभ हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे-जैसे वैश्विक सैटेलाइट जरूरतें बढ़ रही हैं, वैसे-वैसे इसरो के लिए नए अवसर भी लगातार बढ़ेंगे। भारत का यह प्रदर्शन बताता है कि वह अब वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी शक्ति बन चुका है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-03 13:39:20