भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता आज से लागू हो गया है, जिसे औपचारिक रूप से व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता कहा जाता है। इस समझौते के प्रभावी होने के साथ ही भारतीय निर्यातकों के लिए ओमान के बाजार में नई संभावनाएं खुल गई हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह समझौता देश के कई प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को सीधा लाभ देगा। इनमें कपड़ा, चमड़ा, प्लास्टिक, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल, खेल सामग्री और कृषि उत्पाद शामिल हैं। समझौते के तहत भारत को ओमान के बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में तरजीही पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करेगा तथा व्यापार, निवेश और आपूर्ति शृंखला के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा करेगा। ओमान खाड़ी क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और वहां का बंदरगाह ढांचा तथा भौगोलिक स्थिति इसे व्यापक जीसीसी बाजार तक पहुंच का द्वार बनाती है। इस समझौते के लागू होने से भारतीय कंपनियों को न केवल ओमान में, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार नेटवर्क में भी अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। अधिकारियों के अनुसार समझौते के प्रभावी होने के साथ मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बंदरगाहों से पहले ही कई खेपें तरजीही दरों पर भेजी गई हैं। यह विकास भारत की व्यापार नीति में हाल के वर्षों में हुई उस रणनीतिक बदलाव को भी दर्शाता है, जिसमें देश द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के जरिए निर्यात विस्तार पर जोर दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता खासतौर पर छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेगा और भारत-खाड़ी व्यापार संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-06-02 08:21:30