मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया और घरेलू सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार से ही निवेशकों में घबराहट देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स करीब 1,000 अंक तक टूट गया और निफ्टी भी दबाव में आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका और जोखिम से बचने की निवेशक प्रवृत्ति रही। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर की चिंता बढ़ गई है, जिसका सीधा प्रभाव उभरते बाजारों पर पड़ता है। भारतीय बाजार में ऑटो, वित्तीय, रियल्टी, एफएमसीजी और ऊर्जा जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों ने ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में बिकवाली की, जिससे गिरावट और गहरी हो गई। विश्लेषकों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर संकट बढ़ता है, तब विदेशी निवेशक आम तौर पर जोखिमभरे परिसंपत्ति वर्गों से पूंजी निकालते हैं, और इसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में किसी भी बढ़ोतरी का सीधा असर भारत की आयात लागत, महंगाई और चालू खाते के घाटे पर पड़ सकता है, इसलिए तेल-आधारित आशंकाओं ने भी बाजार भावना को कमजोर किया। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से डर आधारित है और यदि वैश्विक स्थिति स्थिर होती है, तो बाजार में आंशिक रिकवरी संभव है। फिलहाल निवेशक संकेतों, तेल की चाल और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। बाजार की इस कमजोरी ने यह भी दिखाया कि वैश्विक घटनाएं भारतीय इक्विटी की दिशा को कितनी तेजी से प्रभावित कर सकती हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-06-03 13:33:28