केंद्र सरकार ने ₹25,000 करोड़ की ‘सार्थक’ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य खाद्य वितरण तंत्र को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और दक्ष बनाना बताया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, ‘सार्थक’ योजना के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के डिजिटलीकरण, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और लाभार्थियों तक खाद्यान्न वितरण की प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह पहल देश के करोड़ों राशन लाभार्थियों को लक्षित करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की सार्वजनिक वितरण प्रणाली दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इसके माध्यम से गरीब और कमजोर वर्गों को रियायती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने राशन कार्ड डिजिटलीकरण, आधार-आधारित प्रमाणीकरण और ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ जैसी पहलों के माध्यम से PDS प्रणाली में सुधार का प्रयास किया है। ‘सार्थक’ योजना को इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
खाद्य नीति विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग से वितरण में होने वाली अनियमितताओं और रिसाव को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही लाभार्थियों को अधिक पारदर्शी और सुगम सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी बड़े कल्याणकारी कार्यक्रम की सफलता केवल बजटीय आवंटन पर निर्भर नहीं करती। राज्यों के साथ समन्वय, तकनीकी अवसंरचना और अंतिम छोर तक प्रभावी कार्यान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
India में खाद्य सुरक्षा और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम लंबे समय से सार्वजनिक नीति के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक तकनीक के उपयोग से इन योजनाओं की प्रभावशीलता और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
फिलहाल ₹25,000 करोड़ की ‘सार्थक’ योजना को भारत की खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-29 18:06:50