भारतीय ड्रोन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है, जहां अहमदाबाद स्थित स्टार्टअप बजरंग यूएवी ने लद्दाख के शिंकुला टॉप पर अपने भारी-भरकम ड्रोन का सफल परीक्षण किया है। कंपनी के PX4P2300 मॉडल ने लगभग 16,400 फीट की ऊंचाई पर 30 किलोग्राम का पेलोड उठाकर अपनी क्षमता साबित की। यह परीक्षण ऐसे वातावरण में किया गया जहां कम तापमान, पतली हवा और ऊँचाई से जुड़े तकनीकी दबाव किसी भी ड्रोन के लिए बड़ी चुनौती होते हैं। इस प्रदर्शन को भारत के स्वदेशी ड्रोन इकोसिस्टम, रक्षा लॉजिस्टिक्स और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आपूर्ति तंत्र के लिए एक बड़ी प्रगति माना जा रहा है। कंपनी के अनुसार, यह ड्रोन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी भारी सामान ले जाने में सक्षम है, जिससे सीमावर्ती इलाकों, आपदा राहत, सैन्य रसद और दुर्गम क्षेत्रों में उपयोग की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। लद्दाख जैसे ऊँचे और संवेदनशील इलाके में सफल परीक्षण यह दिखाता है कि भारतीय स्टार्टअप अब केवल सामान्य ड्रोन नहीं, बल्कि उन्नत भारी-लिफ्ट प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इस तरह की तकनीक उन क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी हो सकती है जहां सड़क मार्ग सीमित हैं और हवाई आपूर्ति समय बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर ऐसे ड्रोन विकसित होने से आयात निर्भरता कम होगी और भारत की एयरोस्पेस एवं रक्षा विनिर्माण क्षमता को नई मजबूती मिलेगी। यह उपलब्धि न केवल एक तकनीकी परीक्षण है, बल्कि यह संकेत भी है कि भारतीय स्टार्टअप अब ऊँचाई आधारित कठिन परिस्थितियों के लिए विश्वस्तरीय समाधान तैयार कर रहे हैं। भविष्य में ऐसे ड्रोन राहत सामग्री, सैन्य उपकरण, मेडिकल सप्लाई और औद्योगिक लॉजिस्टिक्स के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-05-29 15:13:20