असम विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी से जुड़ा बिल पारित कर दिया है, जिससे राज्य देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने समान नागरिक संहिता की दिशा में विधायी कदम उठाया है। इस बिल के पारित होने के बाद असम पूर्वोत्तर भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने इस तरह का कानून अपनाया है। प्रस्तावित कानून का दायरा विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, विरासत और लिव-इन संबंधों जैसे नागरिक मामलों में समान नियम लागू करने से जुड़ा है। बिल में बहुविवाह पर रोक, विवाह और लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने तथा उत्तराधिकार कानूनों में अधिक समानता लाने जैसे प्रावधान शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का तर्क है कि यह कदम नागरिक कानूनों में एकरूपता लाने और सभी समुदायों के लिए समान कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। वहीं, विपक्ष और कई सामाजिक समूहों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ऐसे कानून को लागू करते समय राज्य की सामाजिक विविधता, जनजातीय परंपराओं और संवैधानिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है और कहा है कि इससे राज्य में नागरिक मामलों से जुड़े कानून अधिक स्पष्ट और समान होंगे। विधेयक के पारित होने के बाद अब इसे आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी को अपनाने या उसकी दिशा में ठोस कदम उठाने वाला एक और राज्य बन गया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में समान नागरिक संहिता पर चल रही राष्ट्रीय बहस को और तेज करेगा तथा राज्यों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू करेगा।।
by Dainikshamtak on | 2026-05-28 20:52:29