नाइट फ्रैंक की द वेल्थ रिपोर्ट 2026 के मुताबिक भारत में अरबपतियों की संख्या 2026 से 2031 के बीच 51 प्रतिशत बढ़ सकती है और यह 207 से बढ़कर 313 तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वृद्धि भारत को वैश्विक अमीरों की सूची में और मजबूती देगी, जबकि इसी अवधि में अमेरिका और चीन की वृद्धि दर भारत से कम रहने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में धन सृजन की रफ्तार टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल सेक्टर, पूंजी बाजार और उद्यमिता के विस्तार से आगे बढ़ रही है। पिछले पांच वर्षों में भी भारत में अरबपतियों की संख्या में 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी, जिससे देश दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 में भारत में कुल अरबपतियों की संख्या 207 थी, जबकि अमेरिका और चीन अभी भी पहले और दूसरे स्थान पर बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह वृद्धि केवल संख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि आर्थिक ढांचे के बदलते स्वरूप का संकेत भी है। देश में उच्च आय वर्ग का विस्तार, कॉर्पोरेट वैल्यूएशन, स्टार्टअप इकोसिस्टम, शेयर बाजार में भागीदारी और शहरी संपत्ति मूल्यों में तेजी इस वृद्धि के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। भारत की संपत्ति-सृजन क्षमता खासकर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे आर्थिक केंद्रों में केंद्रित होती जा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की संपत्ति संरचना अधिक विविध और परिपक्व हो रही है, जिससे भविष्य में और अधिक हाई-नेट-वर्थ व्यक्तियों के उभरने की संभावना है। हालांकि अमेरिका और चीन अभी भी कुल अरबपति संख्या में भारत से काफी आगे हैं, लेकिन भारत की वृद्धि दर यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में उसका वैश्विक धन-मानचित्र में प्रभाव और मजबूत होगा। यह रुझान भारत की अर्थव्यवस्था, निवेश माहौल और वैश्विक पूंजी प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-28 20:50:21