अशनीर ग्रोवर ने भारत के कर संरचना पर तीखी टिप्पणी की है। पूर्व भारत पे के सह-संस्थापक ने कहा कि भारत का टैक्स स्ट्रक्चर अमेरिका के समकक्ष प्रतिस्पर्धी है। लेकिन जनता को मिलने वाले लाभ बांग्लादेश जैसे देशों के बराबर हैं। ग्रोवर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह बयान दिया। उन्होंने व्यक्तिगत आयकर स्लैबों की तुलना की। भारत में 30 प्रतिशत टैक्स रेट अमेरिका के उच्च आयकर स्लैबों से कम है। लेकिन सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में भारी अंतर है। ग्रोवर ने कहा कि अमेरिका में उच्च करों के बदले विश्वस्तरीय सड़कें, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा मिलती है। भारत में करदाता सड़क जाम, अस्पतालों में बेड की कमी और स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति का सामना करते हैं। बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी इसी स्तर की सेवाएं उपलब्ध हैं। ग्रोवर ने सुझाव दिया कि कर संरचना सुधारने के बजाय सार्वजनिक व्यय की दक्षता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के लिए रेट कम करना सही दिशा है। लेकिन व्यय में भ्रष्टाचार और अक्षमता समाप्त होनी चाहिए। ग्रोवर ने सरकारी खर्च के गैर-उत्पादक हिस्सों पर कटौती की वकालत की। उन्होंने कहा कि सब्सिडी और फ्रीबीज के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश आवश्यक है। यह बयान उस समय आया जब वित्त मंत्रालय ने नया बजट पेश किया। इसमें करदाताओं को कुछ राहत दी गई। लेकिन ग्रोवर का मानना है कि संरचनात्मक सुधार जरूरी हैं। उन्होंने उद्यमियों के अनुभव साझा किए। कहा कि भारत में बिजनेस करना कठिन है क्योंकि बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रोवर ने करदाताओं से अपील की कि वे अपनी आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा कि उच्च कर केवल तभी उचित हैं जब उसके बदले समानांतर सुविधाएं मिलें। यह टिप्पणी कर नीति बहस को नई दिशा दे सकती है। उद्योगपति और अर्थशास्त्री इस पर अपनी राय दे रहे हैं। सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ग्रोवर के बयान ने कर व्यवस्था सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
by Dainikshamtak on | 2026-05-05 16:06:35