कनाडा की खुफिया एजेंसी का स्वीकार: खालिस्तानी चरमपंथ अब आधिकारिक खतरा

कनाडा की खुफिया एजेंसी का स्वीकार: खालिस्तानी चरमपंथ अब आधिकारिक खतरा

मई 2026 में कनाडा की सुरक्षा बुद्धिमत्ता एजेंसी CSIS ने अपनी 2025 की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में एक बहुत महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज हुआ। पहली बार कनाडा की आधिकारिक खुफिया एजेंसी ने "कनाडा-आधारित खालिस्तानी चरमपंथियों" को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक वास्तविक खतरे के रूप में पहचाना। यह महज एक रिपोर्ट नहीं है। यह कनाडा की सोच और विदेश नीति में एक बड़ा मोड़ है। सालों तक भारत जो कुछ कहता रहा, कनाडा अब खुद वही बात कह रहा है।रिपोर्ट में CSIS ने बिल्कुल स्पष्ट किया है कि खालिस्तान के लिए शांतिपूर्ण तरीके से राजनीतिक आवाज उठाना कनाडा में कानूनन अभी भी अनुमति है। लेकिन एक छोटे लेकिन सक्रिय समूह को चरमपंथी के रूप में परिभाषित किया गया है क्योंकि वह कनाडा की धरती को भारत में हिंसा के लिए धन जुटाने और योजनाएं बनाने के लिए अड्डे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। यह समूह स्थानीय संस्थानों में घुसपैठ कर रहे हैं, समुदाय के निरपेक्ष सदस्यों से धन इकट्ठा कर रहे हैं और उसे हिंसक गतिविधियों के लिए विचलित कर रहे हैं।इस रिपोर्ट का समय बिल्कुल महत्वपूर्ण है। 2025 की शुरुआत में यह रिपोर्ट तैयार की गई, लेकिन इसमें एक अहम ऐतिहासिक संदर्भ है जो इसका आधार बनता है। रिपोर्ट ने 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 की बमबारी का स्पष्ट उल्लेख किया है। जून 1985 में जब कनाडा के आकाश में यह विमान उड़ रहा था, तब समुद्र के ऊपर एक बम ने इसे तबाह कर दिया। 329 लोग मारे गए थे। यह कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी आतंकवादी घटना थी। CSIS की रिपोर्ट ने इस घटना को आज भी एक खुली चेतावनी के रूप में पेश किया है। यह बताता है कि यह खतरा केवल भविष्य की बात नहीं है। यह खतरा सालों पहले से मौजूद है और आज भी बरकरार है।


रिपोर्ट में दो नामों का विशेष जिक्र है जो इस पूरी कहानी को व्यक्तिगत स्तर पर जीवंत कर देता है। हरदीप सिंह निज्जर का नाम सबसे पहले आता है। निज्जर 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया में मारे गए थे। उनकी हत्या के बाद पूरा मामला भारत और कनाडा के बीच एक राजनयिक तूफान का कारण बन गया। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में यह कहा कि भारतीय सरकार इसमें शामिल थी। भारत ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया। लेकिन दोनों देशों के बीच का तनाव इसके बाद कई महीने तक बना रहा। अब CSIS की रिपोर्ट में निज्जर का नाम इस नेटवर्क के साथ जुड़ा हुआ दिख रहा है। दूसरा नाम गुरपतवंत सिंह पन्नून का है। पन्नून भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA की चाहत सूची में हैं। लेकिन केवल भारत में नहीं, अमेरिकी संघीय अदालत में भी उनके खिलाफ मामला चल रहा है। CSIS रिपोर्ट में पन्नून को इसी खालिस्तानी चरमपंथी नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया गया है।


यह रिपोर्ट PM मार्क कार्नी के कार्यकाल में आई है। कार्नी को 2024 में कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया था। ट्रूडो के बाद कार्नी की सरकार ने भारत के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश शुरू की। 2023 में जो तनाव था, उसके बाद यह एक नई शुरुआत है। कनाडा ने अपनी विदेश नीति में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले कनाडा इसे केवल "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता" का मामला मानता रहा। अब वह इसे "राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा" मान रहा है। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कानूनी आधार बदलता है। जहां पहले कनाडाई पुलिस को सीमित कार्रवाई की स्वतंत्रता थी, अब CSIS को इन नेटवर्क्स को तोड़ने और कमजोर करने का स्पष्ट जनादेश है।


इस रिपोर्ट के भारत के लिए कई व्यावहारिक लाभ हैं। पहला, भारत के लंबे समय के आरोप को वैधता मिलती है। भारत वर्षों से कह रहा था कि कनाडा खालिस्तानी चरमपंथियों को शरण दे रहा है। अब कनाडा की अपनी एजेंसी ने यह स्वीकार किया है। दूसरा, इससे भारत की आर्थिक हित भी सुरक्षित हो सकते हैं। कनाडा के साथ व्यापार समझौते की बातचीत जो 2023 के तनाव के बाद रुक गई थी, वह अब फिर से शुरू हो सकती है। भारत कनाडा से यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों के दीर्घकालीन समझौते करना चाहता है। ये भारत की ऊर्जा संक्रमण और अर्धचालक उद्योग के लिए आवश्यक हैं। तीसरा, इस आधिकारिक स्वीकृति से कनाडाई पुलिस के पास इन समूहों द्वारा एकत्र किए गए धन को जब्त करने का कानूनी आधार मजबूत होता है। चौथा, भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा के लिए कनाडा अब बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू कर सकता है।


लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि यह स्वीकृति कनाडा इसलिए दे रहा है क्योंकि सच में चिंता है, या इसलिए कि राजनीतिक दबाव है। CSIS की रिपोर्ट तकनीकी रूप से बेहद विस्तृत है और इसमें ठोस साक्ष्य भी हैं। लेकिन कनाडा का यह बदलाव भी भू-राजनीतिक परिस्थितियों का नतीजा है। भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका बढ़ रही है। कनाडा को भारत के साथ संबंध सुधारने की जरूरत है। इसलिए यह रिपोर्ट केवल सुरक्षा की बात नहीं, बल्कि कनाडा के लिए एक रणनीतिक कदम भी है।


कहने का मतलब यह है कि कनाडा की यह रिपोर्ट एक ऐतिहासिक दस्तावेज है। यह दिखाता है कि कैसे अंतर्राष्ट्रीय संबंध बदलते हैं, कैसे पिछली गलतियों को स्वीकार किया जाता है, और कैसे दो देश एक साझा खतरे के विरुद्ध काम करने का रास्ता खोजते हैं। भारत और कनाडा का रिश्ता एक लंबी यात्रा है जिसमें अभी कई पड़ाव बाकी हैं। लेकिन यह रिपोर्ट निश्चित रूप से एक सकारात्मक दिशा दिखाती है।

by Dainikshamtak on | 2026-05-05 15:57:46

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