तमिलनाडु और गुजरात भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इन राज्यों ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। तमिलनाडु ने पवन ऊर्जा में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य में 10 गीगावाट से अधिक पवन ऊर्जा क्षमता स्थापित है। इसके अतिरिक्त सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। अगले पांच वर्षों में 10 गीगावाट सौर और 2 गीगावाट पवन ऊर्जा जोड़ने का लक्ष्य है। दक्षिण एशियाई नवीकरणीय ऊर्जा गलियारे का निर्माण भी प्रस्तावित है। गुजरात ने सौर ऊर्जा में नेतृत्व स्थापित किया है। राज्य में 42 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता कार्यरत है। यह भारत की कुल नवीकरणीय क्षमता का 16 प्रतिशत है। 25 गीगावाट सौर ऊर्जा में 6 गीगावाट रूफटॉप सौर शामिल है। गुजरात ने इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 अधिसूचित की है। इसका लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावाट क्षमता प्राप्त करना है। ग्रीन हाइड्रोजन और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दोनों राज्यों ने अपतटीय पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से 7453 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त की है। गुजरात और तमिलनाडु के तटों पर 500-500 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाएं स्थापित होंगी। इससे प्रतिवर्ष 3.72 अरब यूनिट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन होगा। 29.8 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। ये पहल भारत के 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। तमिलनाडु ने जिला-स्तरीय डीकार्बनाइजेशन योजनाएं आरंभ की हैं। गुजरात ने रूफटॉप सौर और सौर पार्कों के माध्यम से आम जन को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ा है। दोनों राज्य नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र की तत्परता और नीतिगत प्रतिबद्धता में अग्रसर हैं। यह भारत की जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में ठोस कदम है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-05 13:37:38