भारत सरकार ने भूमि सीमा साझा करने वाले देशों (चीन सहित) से निवेश के लिए विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। प्रेस नोट 3 (2020) के तहत अब इन देशों के निवेशकों को अधिकतम 10% लाभकारी स्वामित्व (beneficial ownership) वाले गैर-नियंत्रणकारी निवेश पर स्वतः मार्ग (automatic route) से निवेश की अनुमति दी गई है। यह संशोधन मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत हुआ। पहले सभी निवेशों पर सरकारी अनुमति अनिवार्य थी, भले ही हिस्सेदारी छोटी हो। अब 10% तक के गैर-नियंत्रणकारी निवेश स्वतः स्वीकृत होंगे, बशर्ते क्षेत्रीय सीमाएं और नियामक शर्तें पूरी हों। निवेश प्राप्त भारतीय कंपनी को उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) को विवरण रिपोर्ट करना होगा। लाभकारी स्वामित्व की परिभाषा धन शोधन निवारण नियम 2005 के अनुरूप तय की गई है। यह बदलाव वैश्विक वेंचर कैपिटल और पीई फंड्स के लिए राहत है, जो अक्सर सीमा देशों से सीमित हिस्सेदारी रखते हैं। रणनीतिक विनिर्माण क्षेत्रों जैसे पूंजीगत सामान, इलेक्ट्रॉनिक घटक, पॉलीसिलिकॉन और सोलर सेल्स के लिए 60-दिन की तेज अनुमति प्रक्रिया भी शुरू। हालांकि, अर्धचालक जैसे संवेदनशील क्षेत्र प्रतिबंधित रहेंगे। यह कदम निवेश को बढ़ावा देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा संतुलित रखेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे विनिर्माण, डीप-टेक और स्टार्टअप्स को फायदा होगा। चीन जैसे देशों से लंबित निवेश प्रस्ताव तेजी से मंजूर हो सकेंगे। सरकार का उद्देश्य व्यापार सुगमता बढ़ाना है, लेकिन नियंत्रण बरकरार रखना। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देगा। वैश्विक फंड्स भारत में तेज निवेश कर सकेंगे।
by Dainikshamtak on | 2026-05-05 13:34:18