राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब की राजनीति में भूचाल आ गया है। राज्यसभा सांसद चड्ढा ने हाल ही में घोषणा की कि वे छह अन्य AAP सांसदों के साथ भाजपा में विलय कर रहे हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि चड्ढा पंजाब के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं। सूत्रों का दावा है कि पंजाब में 63 AAP विधायकों में से 48 ने चड्ढा को समर्थन देने की पेशकश की है। भाजपा को सरकार बनाने के लिए 63 विधायकों की आवश्यकता है। चड्ढा ने कहा है कि वे 15 दिनों में शेष विधायकों को साथ लेकर पूर्ण समर्थन सुनिश्चित करेंगे। यह घटनाक्रम AAP पंजाब इकाई के लिए बड़ा झटका है। भगवंत मान सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। चड्ढा को पंजाब का डी फैक्टो मुख्यमंत्री कहा जाता था। वे 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रमुख चेहरे थे। AAP ने चड्ढा पर भाजपा के साथ साठगांठ का आरोप लगाया लेकिन चड्ढा ने इसे खारिज किया। उन्होंने कहा कि AAP ने अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। भाजपा नेतृत्व ने चड्ढा का स्वागत किया। पंजाब में AAP की 92 विधायक वाली सरकार पर दबाव बढ़ गया है। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे संविधान के प्रावधानों के तहत विलय कर रहे हैं। राज्यसभा में AAP के 10 में से 7 सांसद भाजपा के साथ हैं। पंजाब AAP ने चड्ढा को समझौतावादी बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 63 विधायक समर्थन देते हैं तो सरकार बदल सकती है। चड्ढा युवा और शिक्षित चेहरा हैं। भाजपा पंजाब में सत्ता के करीब आ सकती है। AAP दिल्ली और पंजाब दोनों में कमजोर हुई है। चड्ढा का कद बढ़ा है। पंजाब चुनाव अगले वर्ष हैं लेकिन सरकार परिवर्तन की संभावना बन गई है। भाजपा ने चुप्पी साध रखी है। यह घटना विपक्षी राजनीति को प्रभावित करेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-04-26 18:41:44