भारत की चरम बिजली मांग 252.07 जीडब्ल्यू पर पहुंची: गर्म लहर के बीच अब तक का रिकॉर्ड

भारत की चरम बिजली मांग 252.07 जीडब्ल्यू पर पहुंची: गर्म लहर के बीच अब तक का रिकॉर्ड

भारत ने गंभीर गर्म लहर की स्थिति के बीच रिकॉर्ड चरम बिजली मांग 252.07 गीगावाट दर्ज की। यह अब तक का उच्चतम स्तर है जो 24 अप्रैल को दोपहर में दर्ज किया गया। बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार यह मांग 23 अप्रैल के 240.12 गीगावाट और 22 अप्रैल के 239.70 गीगावाट से काफी अधिक रही। पहले का रिकॉर्ड मई 2024 में 250 गीगावाट का था। उत्तरी, मध्य और पूर्वी भारत में तीव्र गर्मी के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का उपयोग बढ़ गया। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में लंबे समय तक गर्म लहर की चेतावनी जारी की। सरकार ने इस ग्रीष्मकाल में 270 गीगावाट तक मांग का अनुमान लगाया था लेकिन वास्तविक मांग इससे कम रही। बिजली ग्रिड ने सफलतापूर्वक आपूर्ति सुनिश्चित की। कोयला, गैस और जल विद्युत संयंत्रों ने पूर्ण क्षमता पर कार्य किया। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से भी योगदान मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि मांग में वृद्धि आर्थिक विकास, शहरीकरण और गर्मी की तीव्रता से जुड़ी है। पिछले वर्षों में चरम मांग में निरंतर वृद्धि देखी गई। 2023 में यह 240 गीगावाट के आसपास थी। गर्म लहर ने विशेष रूप से दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को प्रभावित किया। बिजली मंत्रालय ने राज्यों को चेतावनी जारी की और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कोयला भंडारण बढ़ाया गया। आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने के प्रयास जारी हैं। लंबी अवधि में सौर ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड प्रणाली विकसित की जा रही है। यह रिकॉर्ड बिजली क्षेत्र की क्षमता को दर्शाता है। सरकार ने अगले वर्षों में 300 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य रखा है। नई परियोजनाओं से आपूर्ति बढ़ेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण गर्म लहरें अधिक तीव्र हो रही हैं। बिजली मांग प्रबंधन के लिए ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों में भी मांग बढ़ी। ग्रिड नियंत्रक ने सभी क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखा। यह उपलब्धि बिजली क्षेत्र के मजबूत बुनियादी ढांचे का प्रमाण है। भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक निर्भरता होगी।


by Dainikshamtak on | 2026-04-26 15:20:33

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