सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 10,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने में असफलता की बात स्वीकारी है। वास्तविक निर्माण मात्र 9,380 किलोमीटर रहा जो निर्धारित लक्ष्य से 620 किलोमीटर कम है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्य कारण भूमि अधिग्रहण में देरी और अन्य नियामक मंजूरी प्राप्त करने में असमय रहा। यह आंकड़ा 2017-18 के बाद का सबसे कम निर्माण है जब 9,829 किलोमीटर सड़कें बनाई गई थीं। पिछले वर्षों की तुलना में प्रदर्शन में गिरावट दर्ज की गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 10,660 किलोमीटर, 2023-24 में 12,349 किलोमीटर और 2022-23 में 10,331 किलोमीटर निर्माण हुआ था। यह कमी नई परियोजनाओं के ठेके देने की गति में भारी गिरावट के कारण भी हुई। 2022-23 में 12,376 किलोमीटर के ठेके दिए गए थे जबकि FY25 में यह संख्या घटकर 7,538 किलोमीटर रह गई। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में स्थानीय विरोध, कानूनी विवाद और मुआवजा संबंधी जटिलताएं प्रमुख बाधाएं बनीं। पर्यावरण मंजूरी और वन भूमि हस्तांतरण में भी विलंब हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर कार्य तेज करने का प्रयास किया लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। सरकार ने ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड परियोजनाओं पर समान जोर दिया था। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और अन्य प्रमुख कॉरिडोर पर कार्य जारी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 13,000 किलोमीटर निर्माण लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु नए विधायी उपाय प्रस्तावित हैं। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल और टोटल इंफ्रास्ट्रक्चर पैकेज से निजी निवेश आकर्षित करने का प्रयास जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध भूमि अधिग्रहण और ठेकेदारी प्रक्रिया सुधार से लक्ष्य प्राप्ति संभव है। यह कमी रसद लागत कम करने और आर्थिक विकास को प्रभावित कर सकती है। मंत्रालय ने डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू कर प्रगति सुधारने का लक्ष्य रखा है।
by Dainikshamtak on | 2026-04-26 15:17:28