भारत और जर्मनी तीन माह के भीतर आठ अरब डॉलर मूल्य के महत्वपूर्ण पनडुब्बी समझौते पर हस्ताक्षर करने की कगार पर हैं। जर्मन रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि यह सौदा प्रोजेक्ट 75-आई के तहत छह उन्नत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए होगा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा जिसमें व्यापक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण शामिल है। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और थायसेनक्रुप मैरिन सिस्टम्स के सहयोग से ये पनडुब्बियां भारत में ही निर्मित होंगी। जर्मनी का टाइप 214 मॉडल आधारित ये पनडुब्बियां एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्शन सिस्टम से लैस होंगी जो पानी के नीचे लंबे समय तक संचालन क्षमता प्रदान करेंगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में कील में जर्मन पनडुब्बी सुविधा का दौरा किया था। इस समझौते से भारतीय नौसेना की पुरानी रूसी पनडुब्बियों की जगह आधुनिक तकनीक ले लेगी। पहले फ्रांस के साथ तीन अतिरिक्त पनडुब्बियों का सौदा रद्द हो सकता है। यह कदम भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करेगा और पनडुब्बी निर्माण में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा। पहली पनडुब्बी सौदा हस्ताक्षर के सात वर्ष बाद तैयार होगी। जर्मनी ने अब तक किसी अन्य देश को इस स्तर की प्रौद्योगिकी हस्तांतरण नहीं दिया था। यह समझौता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा। क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच यह कदम महत्वपूर्ण है। प्रोजेक्ट से हजारों रोजगार सृजित होंगे और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा। नौसेना की युद्ध क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग बढ़ रहा है। यह सौदा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा। भारत ने नौसेना आधुनिकीकरण के लिए बड़े निवेश किए हैं। जर्मनी के साथ यह साझेदारी दीर्घकालिक रणनीतिक महत्व रखती है। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से भविष्य के निर्यात के अवसर भी खुलेंगे। (शब्द संख्या: ३२९)
by Dainikshamtak on | 2026-04-26 15:21:13