केरल के कई स्कूलों ने पारंपरिक पंक्ति आधारित कक्षा बैठने की व्यवस्था को U-आकार या अर्ध-वृत्तीय व्यवस्था से बदलना शुरू कर दिया है। यह परिवर्तन बैकबेंचर की अवधारणा को पूरी तरह समाप्त करने के उद्देश्य से किया गया है। राज्य के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि बैकबेंचर विचार छात्रों के आत्मविश्वास और सीखने पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। U-आकार व्यवस्था में शिक्षक को कक्षा के केंद्र में रखा जाता है जिससे सभी छात्रों को समान दृश्यता और ध्यान मिलता है। इससे शिक्षक-छात्र संपर्क मजबूत होता है और कक्षा में समावेशिता बढ़ती है। यह विचार 2024 की मलयालम फिल्म स्थानार्थी श्रीकुट्टन से प्रेरित है जिसमें कक्षा में U-आकार व्यवस्था दिखाई गई थी। रामविलासम VHSS वलकोम सबसे पहले इस मॉडल को लागू करने वाले स्कूलों में शामिल था। इसके बाद पूरे राज्य में कम से कम आठ स्कूलों ने इसे अपनाया। शिक्षा विभाग ने विशेषज्ञ समिति गठित की है जो केरल के संदर्भ में सबसे उपयुक्त शिक्षा मॉडल की सिफारिश करेगी। व्यवस्था से शिक्षकों को छात्रों पर बेहतर निगरानी रखने और निर्देश देने में सहायता मिलती है। अध्ययन बताते हैं कि U-आकार व्यवस्था चर्चा आधारित कक्षाओं में 77 प्रतिशत से अधिक छात्रों को आरामदायक लगती है। तमिलनाडु ने भी मध्य स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इसे लागू किया है। पंजाब के एक स्कूल ने भी अपनाया। पारंपरिक व्यवस्था में पीछे बैठे छात्र अक्सर कम ध्यान आकर्षित करते थे। नई व्यवस्था सभी को समान अवसर देती है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि सभी बच्चों को एक समान अवसर मिलना चाहिए। अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के स्कूलों में व्यापक स्तर पर इसे लागू करने की योजना है। यह बदलाव केरल शिक्षा प्रणाली में समावेशी और आधुनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। अभिभावकों और शिक्षकों ने इसे सराहा है। कक्षा में सहभागिता और एकाग्रता में सुधार देखा गया। यह सुधार छात्रों के समग्र विकास में सहायक सिद्ध होगा।
by Dainikshamtak on | 2026-04-26 15:20:05