मोहन भागवत बोले, एलजीबीटीक्यू+ समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा, सभी को समान सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए

मोहन भागवत बोले, एलजीबीटीक्यू+ समुदाय समाज का अभिन्न हिस्सा, सभी को समान सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एलजीबीटीक्यू+ समुदाय को लेकर कहा है कि यह समुदाय भी समाज का अभिन्न हिस्सा है और इसके प्रत्येक सदस्य को सम्मान, गरिमा तथा समाज में समान स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ केवल उसकी पहचान के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और समाज को सभी के प्रति संवेदनशील तथा सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सामाजिक समरसता, पारस्परिक सम्मान और संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज की विविधता को स्वीकार करना और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करना एक स्वस्थ और समावेशी समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए तथा सामाजिक व्यवहार में समानता और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। भारत में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय से जुड़े अधिकारों और सामाजिक स्वीकृति पर पिछले कुछ वर्षों में व्यापक सार्वजनिक और न्यायिक चर्चा हुई है। वर्ष 2018 में उच्चतम न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था, जिसके बाद समानता, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर विमर्श और तेज हुआ। हालांकि विवाह, दत्तक ग्रहण और अन्य कानूनी अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा और नीतिगत प्रक्रिया अलग-अलग स्तरों पर जारी है। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के ऐसे वक्तव्य सामाजिक संवाद को प्रभावित कर सकते हैं और विविध समुदायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। वहीं विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की इस विषय पर अलग-अलग राय भी सामने आती रही है। मोहन भागवत के इस बयान को सामाजिक समावेशन, गरिमा और सम्मान पर केंद्रित संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस विषय पर समाज, नीति निर्माताओं और विभिन्न संगठनों के बीच संवाद जारी रहने की संभावना है।

by Dainikshamtak on | 2026-07-27 16:18:33

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