मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक को पारित कर दिया है। इसके साथ ही राज्य ने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि यह संविधान की भावना और समानता के सिद्धांत को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार के अनुसार, समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध कराना है। वहीं, विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर चर्चा और व्यापक परामर्श की आवश्यकता पर बल दिया है। विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार का कहना है कि यह कानून किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास है। विशेषज्ञों का मानना है कि समान नागरिक संहिता लंबे समय से राष्ट्रीय बहस का विषय रही है और संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत इसका उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसके व्यावहारिक स्वरूप और प्रभाव को लेकर अलग-अलग मत हैं। विधेयक पारित होने के बाद अब आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी, जिनमें राज्यपाल की मंजूरी तथा अधिसूचना जारी होने के बाद कानून लागू करने की प्रक्रिया शामिल होगी। आने वाले समय में इसके नियमों और क्रियान्वयन की रूपरेखा भी स्पष्ट की जाएगी। यह निर्णय मध्य प्रदेश की विधायी और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-22 16:08:51