भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। ISRO प्रमुख ने कहा है कि भारत का उद्देश्य अगले 10 वर्षों में वैश्विक वाणिज्यिक सैटेलाइट (Commercial Space) बाजार में 8 से 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करना है। वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है और सैटेलाइट निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation), संचार, नेविगेशन और डेटा सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपने अंतरिक्ष उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। ISRO प्रमुख ने कहा कि सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने, IN-SPACe जैसी संस्थाओं की स्थापना और नई अंतरिक्ष नीति लागू होने के बाद भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को नई गति मिली है। आज भारत में सैटेलाइट निर्माण, लॉन्च व्हीकल विकास, अंतरिक्ष अनुप्रयोगों और स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ी संख्या में निजी कंपनियां निवेश कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत में विश्वसनीय लॉन्च सेवाएं, उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग क्षमता और बढ़ता निजी निवेश भारत को वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में मजबूत स्थिति दिला सकते हैं। भारत पहले ही कई देशों के उपग्रह सफलतापूर्वक लॉन्च कर चुका है और अब उच्च मूल्य वाले अंतरिक्ष मिशनों तथा व्यावसायिक सेवाओं पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। यदि निर्धारित लक्ष्य हासिल होता है, तो इससे देश में निवेश, रोजगार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीकों के विकास को नई गति मिलेगी। साथ ही भारत वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग का आकार कई गुना बढ़ने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-21 16:33:54