विश्व व्यापार संगठन (WTO) से संबंधित एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2047 तक वैश्विक मर्चेंडाइज़ (वस्तु) निर्यात में 10% हिस्सेदारी हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य 'विकसित भारत 2047' की व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत भारत को वैश्विक विनिर्माण, निर्यात और व्यापार का प्रमुख केंद्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में भारत का वैश्विक वस्तु निर्यात में योगदान अपेक्षाकृत कम है, लेकिन सरकार का मानना है कि विनिर्माण क्षमता बढ़ाने, लॉजिस्टिक्स सुधारने, व्यापार समझौतों का विस्तार करने और निर्यातोन्मुख नीतियों के माध्यम से आने वाले वर्षों में इसमें उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने हाल के वर्षों में कई देशों और आर्थिक समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिससे भारतीय उत्पादों को नए वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने की संभावना है। इसके साथ ही 'मेक इन इंडिया', उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, बुनियादी ढांचे में निवेश और बंदरगाहों तथा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के आधुनिकीकरण जैसे कदम भी निर्यात क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि 10% वैश्विक निर्यात हिस्सेदारी हासिल करने के लिए भारत को उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण, प्रतिस्पर्धी लागत, तकनीकी नवाचार, कुशल श्रमशक्ति और मजबूत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करनी होगी। इसके अलावा, निर्यातकों को वित्तीय सहायता, सरल व्यापार प्रक्रियाएं और डिजिटल व्यापार सुविधाएं भी महत्वपूर्ण होंगी। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि भारत इस लक्ष्य की दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है, तो इससे रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा आय, औद्योगिक विकास और आर्थिक वृद्धि को नई गति मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां भी इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
by Dainikshamtak on | 2026-07-22 16:08:16