मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) से संबंधित विधेयक के मसौदे (Draft Bill) को मंजूरी दे दी है। यदि यह मसौदा विधानसभा से पारित होकर कानून का रूप लेता है, तो मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा विकसित करना और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में एकरूपता लाना है। अब इस विधेयक को विधानसभा में पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जहां इस पर चर्चा और मतदान होगा।
सोशल मीडिया पर इस निर्णय के साथ यह दावा भी व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है कि "मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उसी स्थान पर UCC लागू किया, जहां 310 वर्ष पहले मोहम्मद खान ने शरिया कानून लागू किया था।" हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों या विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोतों से नहीं हुई है। इसलिए इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। इतिहास और वर्तमान सरकारी निर्णयों से जुड़े ऐसे दावों की पुष्टि आधिकारिक अभिलेखों और प्रमाणित स्रोतों से करना आवश्यक होता है।
समान नागरिक संहिता भारत में लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय रही है। संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत समान नागरिक संहिता लागू करने का उल्लेख है। समर्थकों का मानना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस विषय पर सभी समुदायों से व्यापक संवाद और संवैधानिक पहलुओं पर सावधानीपूर्वक विचार आवश्यक है। अब मध्य प्रदेश में प्रस्तावित विधेयक का अंतिम स्वरूप और उसके प्रावधान विधानसभा की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
by Dainikshamtak on | 2026-07-20 19:24:44