भारत के ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी तकनीकी सफलता मिली है। सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने अपने भोपाल संयंत्र में भारत का पहला स्वदेशी 1200 kV (किलोवोल्ट) अल्ट्रा हाई-वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर सफलतापूर्वक विकसित किया है। यह उपलब्धि देश की विद्युत ट्रांसमिशन क्षमता, स्वदेशी तकनीकी विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। 1200 kV श्रेणी के ट्रांसफॉर्मर का उपयोग अत्यधिक उच्च वोल्टेज पर बिजली के कुशल और लंबी दूरी तक संचरण (Power Transmission) के लिए किया जाता है। इससे ट्रांसमिशन के दौरान ऊर्जा की हानि कम होती है और बड़ी मात्रा में बिजली को अधिक दक्षता के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी उच्च क्षमता वाले ट्रांसफॉर्मर का स्वदेशी निर्माण भारत को अत्याधुनिक पावर ग्रिड तकनीक वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में मजबूत स्थान दिलाता है। यह उपलब्धि आयात पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' जैसे अभियानों को भी मजबूती देती है। भोपाल स्थित BHEL संयंत्र लंबे समय से देश के ऊर्जा उपकरण निर्माण का प्रमुख केंद्र रहा है और इस नई उपलब्धि ने उसकी तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर और मजबूत किया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में अल्ट्रा हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के साथ इस तरह की स्वदेशी तकनीक भारत की बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राष्ट्रीय ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में मदद मिलेगी और देश के विभिन्न क्षेत्रों तक बिजली की आपूर्ति अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। यह उपलब्धि भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और उच्च स्तरीय विद्युत उपकरण निर्माण में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-20 19:20:32