भारत पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक व्यापार (Global Trade) के क्षेत्र में तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है। वर्ष 2021 से 2026 के बीच भारत ने दुनिया के कई प्रमुख देशों और आर्थिक समूहों के साथ आठ महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreements - FTAs) किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य निर्यात बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, भारतीय उद्योगों को नए बाजार उपलब्ध कराना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में भारत की भूमिका को मजबूत बनाना है। इस अवधि में भारत ने 2021 में मॉरीशस, 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ऑस्ट्रेलिया, 2024 में यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA), 2025 में यूनाइटेड किंगडम (UK) और ओमान, तथा 2026 में यूरोपीय संघ (European Union) और न्यूज़ीलैंड के साथ महत्वपूर्ण व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया। इन समझौतों के माध्यम से भारत को वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात, कृषि, विनिर्माण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, आईटी सेवाओं और निवेश जैसे क्षेत्रों में नए अवसर मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन व्यापार समझौतों से भारतीय कंपनियों को कम शुल्क (Tariffs), बेहतर बाजार पहुंच और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सकती है। साथ ही विदेशी निवेश आकर्षित करने और घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन देने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि प्रत्येक FTA के प्रभाव का आकलन उसके अंतिम प्रावधानों, कार्यान्वयन और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के आधार पर किया जाएगा। भारत की व्यापार नीति अब केवल पारंपरिक साझेदारों तक सीमित नहीं रहकर यूरोप, एशिया और ओशिनिया जैसे क्षेत्रों तक विस्तारित हो रही है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक व्यापार और विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। यदि इन समझौतों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में भारत के निर्यात, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-21 16:38:52