पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक का जारी अनशन 19वें दिन में प्रवेश कर गया है। इस बीच चिकित्सकों ने बताया है कि अनशन के दौरान उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है, जिसे स्वास्थ्य की दृष्टि से गंभीर संकेत माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक उपवास के कारण शरीर में ऊर्जा की कमी, मांसपेशियों का क्षय, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, निम्न रक्तचाप, निर्जलीकरण तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी बनाए रखने की सलाह दी है। सोनम वांगचुक अपने विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर यह अनशन कर रहे हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य संबंधित मांगों की ओर सरकार और समाज का ध्यान आकर्षित करना है। वहीं प्रशासन और संबंधित पक्षों की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाले उपवास के दौरान शरीर में पोषण की कमी और चयापचय संबंधी परिवर्तन तेजी से हो सकते हैं, इसलिए चिकित्सकीय निगरानी अत्यंत आवश्यक होती है। हालांकि किसी व्यक्ति की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति का आकलन केवल विस्तृत चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही किया जा सकता है। इस बीच विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। दूसरी ओर उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशना सबसे प्रभावी मार्ग होता है। फिलहाल सभी की नजरें सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति, डॉक्टरों की आगामी मेडिकल रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-07-16 15:44:19