वर्ष 2026 की पहली छमाही में भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार (मर्चेंडाइज ट्रेड) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उपलब्ध व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2026 के दौरान भारत का चीन से आयात बढ़कर 79.41 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि इसी अवधि में एक वर्ष पहले यानी जनवरी से जून 2025 के दौरान यह 65.20 अरब अमेरिकी डॉलर था। दूसरी ओर भारत का चीन को निर्यात भी बढ़ोतरी के साथ 8.97 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 12.31 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि हुई है, हालांकि आयात और निर्यात के बीच अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, औद्योगिक उपकरण, रसायन, सौर उपकरण और विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों के लिए बड़ी मात्रा में चीन से आयात करता है। वहीं भारत की ओर से लौह अयस्क, रसायन, कृषि एवं समुद्री उत्पाद तथा कुछ औद्योगिक वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत द्वारा घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं और निर्यात क्षमता में सुधार के प्रयासों के बावजूद चीन के साथ व्यापारिक असंतुलन एक महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। हालांकि निर्यात में दर्ज वृद्धि भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग में सुधार का संकेत भी मानी जा रही है। सरकार लगातार घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम उठा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय विनिर्माण और उच्च मूल्य वाले निर्यात क्षेत्रों का विस्तार होता है, तो आने वाले वर्षों में व्यापार संतुलन में सुधार की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल 2026 की पहली छमाही के आंकड़े भारत और चीन के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों के साथ-साथ व्यापारिक असंतुलन की चुनौती को भी रेखांकित करते हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-07-16 15:43:48