भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। वहीं पूरे वित्त वर्ष के दौरान देश की सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिनमें धीमी आर्थिक वृद्धि, भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता शामिल हैं। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू मांग, बुनियादी ढांचा निवेश, सेवा क्षेत्र का विस्तार और विनिर्माण गतिविधियों में सुधार ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन दिया है। चौथी तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की वृद्धि यह संकेत देती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष के अंतिम चरण में भी गति बनाए रखने में सफल रही। सरकार द्वारा सड़क, रेलवे, बंदरगाह, ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना में किए गए निवेश का प्रभाव आर्थिक गतिविधियों में दिखाई दे रहा है। इसके अलावा सेवा क्षेत्र, विशेष रूप से वित्तीय सेवाएं, सूचना प्रौद्योगिकी, व्यापार और पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों ने भी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत की बड़ी उपभोक्ता आबादी, बढ़ता निवेश और स्थिर वित्तीय व्यवस्था आर्थिक मजबूती के प्रमुख कारक बने हुए हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि वैश्विक परिस्थितियों, कच्चे तेल की कीमतों और निर्यात मांग में उतार-चढ़ाव पर लगातार नजर बनाए रखना आवश्यक होगा। पूरे वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करती है। यह प्रदर्शन निवेशकों, उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि निवेश और उपभोग की वर्तमान गति बनी रहती है तो भारत आने वाले वर्षों में भी मजबूत आर्थिक वृद्धि दर्ज कर सकता है। यह आंकड़ा देश की आर्थिक लचीलापन क्षमता और दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को भी रेखांकित करता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-06 16:36:59