भारत अपने हितों को प्राथमिकता देगा, रूस से संबंध मजबूत रहेंगे: पुतिन

भारत अपने हितों को प्राथमिकता देगा, रूस से संबंध मजबूत रहेंगे: पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत की विदेश नीति और उसकी रणनीतिक स्वायत्तता पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत की कूटनीतिक भागीदारी और संवाद रूस के साथ उसके लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को कमजोर नहीं करते हैं। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और प्रमुख शक्तियों के बीच नए समीकरण बन रहे हैं।

पुतिन के अनुसार, भारत और रूस के बीच संबंध दशकों से विश्वास, सहयोग और पारस्परिक सम्मान पर आधारित रहे हैं। दोनों देशों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर समय-समय पर सहयोग किया है और कई क्षेत्रों में मजबूत रणनीतिक साझेदारी विकसित की है। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाता है।

भारत और रूस के संबंधों का इतिहास शीत युद्ध काल से जुड़ा हुआ है। रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग रहा है। रूस लंबे समय से भारत के प्रमुख रक्षा साझेदारों में शामिल रहा है, जबकि ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर मिलकर काम किया है।

वहीं दूसरी ओर, भारत और अमेरिका के संबंध भी पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं। व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, निवेश और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने साझेदारी का विस्तार किया है। भारत ने विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संबंधों को संतुलित रखने की नीति अपनाई है, जिसे अक्सर उसकी रणनीतिक स्वायत्तता के दृष्टिकोण से देखा जाता है।

विश्लेषकों का मानना है कि भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख आधार बहु-संरेखण (multi-alignment) और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना रहा है। इसी कारण भारत विभिन्न वैश्विक मंचों पर अलग-अलग देशों के साथ सहयोग करते हुए अपने स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनाए रखने का प्रयास करता है। यह दृष्टिकोण उसे बदलते वैश्विक परिदृश्य में लचीलापन प्रदान करता है।

रूस और भारत के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंधों में भी हाल के वर्षों में वृद्धि देखी गई है। ऊर्जा आयात, उर्वरक, रक्षा उपकरण और अन्य क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों की साझेदारी के महत्वपूर्ण आयाम बने हुए हैं। साथ ही दोनों देश BRICS और शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी एक साथ कार्य करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और अन्य साझेदार देशों के साथ समानांतर रूप से विकसित होती साझेदारियां उसकी वैश्विक भूमिका को और व्यापक बनाती हैं। ऐसे में किसी एक देश के साथ बढ़ते संबंधों को दूसरे देश के साथ संबंधों के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि व्यापक रणनीतिक संतुलन के हिस्से के रूप में समझा जाता है।

पुतिन का यह बयान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रूस-भारत संबंधों के प्रति मॉस्को के दृष्टिकोण को दर्शाता है। इसे ऐसे संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि रूस भारत के अन्य प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ बढ़ते संबंधों के बावजूद दोनों देशों के पारंपरिक और दीर्घकालिक संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है।

by Dainikshamtak on | 2026-06-05 19:42:34

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