भारत ने अपने पहले स्वदेशी हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन प्रोजेक्ट को मंजूरी देकर हरित परिवहन और आत्मनिर्भर तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय रेलवे द्वारा स्वीकृत इस परियोजना के तहत एक 10-कोच वाली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का परीक्षण हरियाणा के जींद–सोनीपत रेल मार्ग पर किया जाएगा। यह पहल देश के रेल नेटवर्क को अधिक स्वच्छ, टिकाऊ और भविष्य के अनुरूप बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
परियोजना के अनुसार, ट्रेन को 1,200 किलोवाट क्षमता वाले हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम से संचालित किया जाएगा। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया के माध्यम से बिजली उत्पन्न की जाती है, जिससे ट्रेन को ऊर्जा मिलती है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता और मुख्य उप-उत्पाद के रूप में जल उत्पन्न होता है। इसी कारण इसे स्वच्छ परिवहन तकनीकों में महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस परियोजना के लिए जींद में एक स्वदेशी हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग स्टेशन भी विकसित किया जा रहा है। यह स्टेशन ट्रेन में हाइड्रोजन ईंधन भरने की सुविधा प्रदान करेगा और पूरे परिचालन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, परियोजना में सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है और इसके लिए उन्नत लीक डिटेक्शन सिस्टम तथा चौबीसों घंटे निगरानी व्यवस्था को शामिल किया गया है।
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों में स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। रेलवे, जो दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, देश के कुल परिवहन ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में हाइड्रोजन आधारित तकनीक का उपयोग उत्सर्जन कम करने के प्रयासों को नई दिशा दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ईंधन विशेष रूप से उन रेल मार्गों के लिए उपयोगी हो सकता है जहां पूर्ण विद्युतीकरण आर्थिक या तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। इसके अलावा, यह तकनीक डीजल इंजनों पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में भी सहायक हो सकती है। कई देशों ने पिछले वर्षों में हाइड्रोजन ट्रेनों के परीक्षण और संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
भारतीय रेलवे ने भविष्य में विरासत और दर्शनीय पर्यटन मार्गों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनों को तैनात करने की योजना भी बनाई है। इससे न केवल पर्यावरणीय लाभ मिलने की उम्मीद है, बल्कि पर्यटन और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। परियोजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन का सफल परीक्षण भारत के लिए तकनीकी उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे देश की अनुसंधान, विनिर्माण और स्वच्छ ऊर्जा क्षमताओं को बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही, यह परियोजना भविष्य में हरित सार्वजनिक परिवहन के व्यापक विस्तार का आधार भी बन सकती है।
भारत का यह कदम वैश्विक स्तर पर उभरती हाइड्रोजन आधारित परिवहन तकनीकों के क्षेत्र में उसकी भागीदारी को मजबूत करता है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो यह देश के रेल परिवहन तंत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-05 19:43:52