वाराणसी में आज होगी ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक

वाराणसी में आज होगी ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की दूसरी बैठक

वाराणसी में आज ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह (BRICS Culture Working Group) की दूसरी बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने, साझा विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने और रचनात्मक क्षेत्रों में साझेदारी को विस्तारित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस आयोजन के माध्यम से सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को संस्कृति, कला, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा।

ब्रिक्स समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ हाल के वर्षों में शामिल हुए नए सदस्य देश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संगठन आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के साथ-साथ सांस्कृतिक संबंधों को भी अपनी बहुआयामी साझेदारी का अहम हिस्सा मानता है। संस्कृति कार्य समूह की बैठकों का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी समझ को बढ़ाना और लोगों के स्तर पर संपर्क को मजबूत करना है।

वाराणसी को इस बैठक के आयोजन स्थल के रूप में चुना जाना भी विशेष महत्व रखता है। दुनिया के सबसे प्राचीन जीवंत शहरों में शामिल वाराणसी भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। शहर अपनी समृद्ध परंपराओं, संगीत, कला, साहित्य और धार्मिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। ऐसे वातावरण में आयोजित बैठक सांस्कृतिक संवाद को एक विशेष आयाम प्रदान कर सकती है।

बैठक के दौरान सांस्कृतिक विरासत के डिजिटलीकरण, संग्रहालयों के बीच सहयोग, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण, सांस्कृतिक पर्यटन और रचनात्मक उद्योगों के विकास जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्रौद्योगिकियों के बढ़ते उपयोग के साथ सांस्कृतिक संपदाओं को संरक्षित करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिन पर सदस्य देश साझा अनुभवों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

भारत लंबे समय से सांस्कृतिक कूटनीति को अपनी विदेश नीति के महत्वपूर्ण आयामों में शामिल करता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संस्कृति, योग, पारंपरिक ज्ञान, शास्त्रीय कलाओं और विरासत स्थलों को बढ़ावा देने के प्रयास लगातार किए जाते रहे हैं। वाराणसी में आयोजित यह बैठक भारत को अपनी सांस्कृतिक विविधता और विरासत को वैश्विक प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी प्रदान करती है।

विश्लेषकों के अनुसार, सांस्कृतिक सहयोग केवल विरासत संरक्षण तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक अवसरों को भी बढ़ावा देता है। सांस्कृतिक पर्यटन, रचनात्मक उद्योग, फिल्म, संगीत और कला जैसे क्षेत्रों में सहयोग सदस्य देशों के बीच नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। इससे लोगों के बीच संपर्क बढ़ने के साथ-साथ आपसी समझ और विश्वास को भी मजबूती मिलती है।

ब्रिक्स देशों का वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव संगठन के सांस्कृतिक आयाम को भी अधिक महत्वपूर्ण बना रहा है। ऐसे में संस्कृति कार्य समूह की बैठकें सदस्य देशों को साझा चुनौतियों और अवसरों पर सहयोग बढ़ाने का मंच उपलब्ध कराती हैं। वाराणसी में आयोजित दूसरी बैठक से भविष्य की सांस्कृतिक पहलों और सहयोग कार्यक्रमों के लिए दिशा तय होने की उम्मीद की जा रही है।

यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक विरासत और ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ते बहुपक्षीय सहयोग को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में सांस्कृतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है।

by Dainikshamtak on | 2026-06-04 20:41:08

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