केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार E85 ईंधन की कीमत को पेट्रोल की तुलना में काफी कम रखने की दिशा में काम कर रही है। उनका यह बयान भारत में वैकल्पिक और जैव-ईंधन आधारित ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देने की नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। E85 एक ऐसा ईंधन मिश्रण है जिसमें बड़ी मात्रा में एथेनॉल होता है और इसे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने के एक उपाय के रूप में देखा जाता है। मंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य केवल ईंधन मिश्रण बढ़ाना नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए इसे आर्थिक रूप से भी आकर्षक बनाना है, ताकि लोग अधिक स्वच्छ ईंधन विकल्पों की ओर स्वाभाविक रूप से बढ़ें। भारत लंबे समय से एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, और सरकार का मानना है कि इससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटेगी, किसानों को एथेनॉल उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय मिलेगी और पर्यावरणीय लाभ भी होंगे। E85 की कीमत को पेट्रोल से नीचे रखने का प्रयास इस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वैकल्पिक ईंधनों को प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। हालांकि, ऐसे ईंधनों की लागत, उपलब्धता, इंजन अनुकूलता और देशव्यापी बुनियादी ढांचे जैसे पहलू भी नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि E85 को पेट्रोल से काफी सस्ता रखा जाता है, तो इससे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की मांग बढ़ सकती है और बाजार में नए निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है। सरकार की यह सोच ऊर्जा सुरक्षा, स्वदेशी संसाधनों के उपयोग और हरित संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत देती है। आने वाले समय में इस नीति के व्यावहारिक प्रभाव ईंधन मूल्य निर्धारण, ऑटोमोबाइल उद्योग और उपभोक्ता व्यवहार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकते हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-06-04 13:29:55