भारतीय रिजर्व बैंक ने उन रिपोर्टों को गलत बताया है जिनमें दावा किया गया था कि उसने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है। आरबीआई के अनुसार, उसके भौतिक सोने के भंडार में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 880.52 टन पर स्थिर बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि सोने से जुड़ी परिसंपत्तियों और उनके लेखांकन को लेकर फैलाई जा रही सूचनाएं तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। यह स्पष्टीकरण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में स्वर्ण कीमतों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंकों की खरीद-बिक्री को लेकर निवेशकों के बीच कई तरह की अटकलें चल रही थीं। आरबीआई की ओर से दी गई सफाई से यह संदेश मिलता है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में स्वर्ण हिस्सेदारी स्थिर बनी हुई है और किसी बड़े पैमाने पर भौतिक सोना नहीं बेचा गया है। केंद्रीय बैंक आम तौर पर अपने स्वर्ण भंडार का प्रबंधन सावधानीपूर्वक करता है, क्योंकि सोना न केवल एक सुरक्षित परिसंपत्ति माना जाता है, बल्कि यह विदेशी मुद्रा भंडार की विश्वसनीयता और संतुलन का भी अहम हिस्सा होता है। 880.52 टन का स्तर इस बात का संकेत है कि आरबीआई ने अपने स्वर्ण भंडार को रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में बनाए रखा है। यह सफाई बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गलत सूचनाएं अक्सर निवेश भावना और मुद्रा बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकती हैं। आरबीआई का यह रुख यह भी दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अपने भंडार प्रबंधन के बारे में पारदर्शी और तथ्य-आधारित जानकारी देने के पक्ष में है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-04 13:37:14