केंद्र सरकार ने घरेलू विमानन कंपनियों को विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव से राहत देने के लिए ₹10,000 करोड़ की एक बार की कीमत स्थिरीकरण योजना को मंजूरी दे दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एटीएफ कीमतों में बढ़ोतरी से भारतीय एयरलाइंस की लागत पर भारी दबाव बना हुआ है। सरकार के अनुसार यह सहायता सीधे एयरलाइंस को नहीं, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम के रूप में दी जाएगी, ताकि वे ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों और सरकारी रूप से निर्धारित बेंचमार्क के बीच के अंतर की भरपाई कर सकें। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइंस को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों परिचालनों में अपेक्षाकृत स्थिर ईंधन कीमतें मिलें और उनकी वित्तीय योजना अधिक अनुमानित हो सके। रिपोर्टों के मुताबिक यह व्यवस्था सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस के लिए उपलब्ध होगी और इसे एक रिवॉल्विंग फंड की तरह चलाया जाएगा। यानी अंतरराष्ट्रीय कीमतों के घटने पर संबंधित कंपनियों से राशि वापस ली जाएगी, जिससे यह कोष समय के साथ पुनः भरता रहेगा। सरकार ने यह भी कहा है कि यह उपाय केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि विमानन क्षेत्र को लंबी अवधि की अस्थिरता से बचाने के लिए तैयार किया गया है। एटीएफ की ऊंची कीमतें भारतीय हवाई किरायों, एयरलाइन मार्जिन और विमानन क्षेत्र की समग्र लाभप्रदता पर सीधा असर डालती हैं। ऐसे में इस फंड से एयरलाइंस को कुछ हद तक लागत स्थिरता और परिचालन सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। यह निर्णय विमानन क्षेत्र में उपभोक्ताओं, कंपनियों और आपूर्ति शृंखला सभी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ईंधन लागत इस उद्योग का सबसे बड़ा खर्च घटक है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-04 13:35:26