म्यांमार ने भारत को दिया सुरक्षा आश्वासन, रणनीतिक सहयोग को मिली मजबूती

म्यांमार ने भारत को दिया सुरक्षा आश्वासन, रणनीतिक सहयोग को मिली मजबूती

म्यांमार ने भारत को आश्वासन दिया है कि उसकी भूमि का उपयोग भारत की सुरक्षा, स्थिरता या राष्ट्रीय हितों के खिलाफ गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया जाएगा। यह आश्वासन ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं को लेकर संवाद तेज़ हो रहा है। इस घटनाक्रम को भारत-म्यांमार संबंधों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, म्यांमार के राष्ट्रपति ने भारत की अपनी प्रमुख विदेश यात्रा के दौरान यह भरोसा व्यक्त किया। दोनों देशों ने सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। भारत लंबे समय से पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय सीमा-पार उग्रवादी नेटवर्कों और अवैध गतिविधियों को लेकर पड़ोसी देशों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर देता रहा है। ऐसे में म्यांमार का यह आश्वासन सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत और म्यांमार लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं, जो अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम जैसे राज्यों से जुड़ी हुई है। इस क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से कई उग्रवादी संगठनों की गतिविधियां देखी गई हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय से सीमा-पार गतिविधियों पर निगरानी मजबूत हो सकती है और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।

दोनों देशों के संबंध केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। भारत म्यांमार को अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में देखता है। इसी रणनीति के तहत भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से सड़क मार्ग के माध्यम से जोड़ना है। इस परियोजना के पूर्ण होने से व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा, कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना भी भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह परियोजना भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को समुद्री और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से बेहतर संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित की जा रही है। विश्लेषकों का कहना है कि इन परियोजनाओं से पूर्वोत्तर भारत की आर्थिक संभावनाओं को मजबूती मिल सकती है और क्षेत्रीय एकीकरण को बढ़ावा मिल सकता है।

हाल के वर्षों में म्यांमार का रणनीतिक महत्व और बढ़ा है। देश में उपलब्ध दुर्लभ खनिज संसाधन, विशेष रूप से रेयर अर्थ मिनरल्स, तथा उसकी भौगोलिक स्थिति ने वैश्विक शक्तियों का ध्यान आकर्षित किया है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच स्थित म्यांमार को क्षेत्रीय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत म्यांमार के साथ अपने संबंधों को संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ा रहा है। सुरक्षा सहयोग, संपर्क परियोजनाओं और आर्थिक साझेदारी पर बढ़ता ध्यान दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को मजबूत कर सकता है। म्यांमार द्वारा भारत को दिया गया हालिया आश्वासन इसी व्यापक सहयोगी ढांचे का हिस्सा माना जा रहा है।

भारत के लिए म्यांमार केवल एक पड़ोसी देश नहीं बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सेतु है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा, संपर्क और आर्थिक विकास के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

by Dainikshamtak on | 2026-06-04 20:04:10

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