*राशन से AI तक: भारत का PDS सिस्टम अब होगा पूरी तरह डिजिटल*
भारत का सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) दशकों से करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा का आधार रही है। लेकिन अब सरकार इसे केवल राशन बांटने की व्यवस्था नहीं, बल्कि एक आधुनिक, डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सप्लाई चेन में बदलने की तैयारी कर रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई योजना को मंजूरी दी है, जिसका नाम है **सार्थक-पीडीएस (SARTHAK-PDS)**। 25,530 करोड़ रुपये के बजट वाली यह योजना अगले पांच वर्षों तक लागू रहेगी और देश के लगभग 80 करोड़ लाभार्थियों को प्रभावित करेगी। इस योजना का उद्देश्य केवल राशन वितरण को आसान बनाना नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को अधिक पारदर्शी, कुशल और तकनीक-संचालित बनाना भी है।
भारत में अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि राशन व्यवस्था में फर्जी कार्ड, डुप्लीकेट लाभार्थी, अनाज की चोरी, कालाबाजारी और वितरण में अनियमितताएं बड़ी समस्याएं हैं। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से इन चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सोच के साथ SARTHAK-PDS को डिजाइन किया गया है।
यह योजना दरअसल दो बड़े कार्यक्रमों को एक छत के नीचे लाती है। पहला, राज्यों को खाद्यान्न के परिवहन और उचित मूल्य की दुकानों यानी फेयर प्राइस शॉप्स के संचालन में वित्तीय सहायता देना। दूसरा, SMART-PDS के तहत राशन नेटवर्क का तकनीकी आधुनिकीकरण करना। सरकार का कहना है कि इससे राज्यों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा और राशन वितरण प्रणाली पहले से कहीं अधिक प्रभावी बनेगी।
इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका तकनीकी ढांचा है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस परियोजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए तीन प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किए हैं, जिन्हें NIRMAL, ASHA और SAKSHAM नाम दिया गया है।
सबसे पहला प्लेटफॉर्म है **NIRMAL**। यह एक AI आधारित लाभार्थी रजिस्ट्री होगी। इसका काम देशभर में मौजूद राशन कार्ड धारकों का एक रियल-टाइम डेटाबेस तैयार करना है। अक्सर देखा गया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई जगह राशन कार्ड बने होते हैं या ऐसे लोगों के नाम सिस्टम में बने रहते हैं जो अब पात्र नहीं हैं। इन्हें आमतौर पर “घोस्ट बेनिफिशियरी” कहा जाता है। NIRMAL ऐसे मामलों की पहचान करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी लाभ केवल उन्हीं लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके हकदार हैं। सरल शब्दों में कहें तो यदि कोई व्यक्ति दो अलग-अलग जगहों से राशन लेने की कोशिश करेगा, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ सकेगा।
दूसरा प्लेटफॉर्म है **ASHA**। यह एक AI आधारित बहुभाषी शिकायत निवारण और फीडबैक सिस्टम होगा। इसका उद्देश्य लाभार्थियों को अपनी समस्याएं दर्ज कराने का आसान माध्यम उपलब्ध कराना है। यह प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप, चैटबॉट्स और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़ा होगा। सरकार का दावा है कि यह सिस्टम प्रतिदिन लगभग तीन लाख शिकायतों और संवादों को संभालने में सक्षम होगा। इससे लोगों को राशन से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है **SAKSHAM**। इसका लक्ष्य खाद्यान्न की पूरी सप्लाई चेन को डिजिटाइज करना है। इस व्यवस्था के तहत हर अनाज की बोरी को एक यूनिक QR कोड दिया जाएगा। इसके अलावा खाद्यान्न परिवहन करने वाले वाहनों में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य होगी। इसका मतलब यह है कि सरकार किसी भी समय यह देख सकेगी कि अनाज कहां से निकला, किस रास्ते से जा रहा है और कब अपने गंतव्य तक पहुंचा। इससे रास्ते में होने वाली चोरी, कालाबाजारी और अनाज की हेराफेरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
सरकार का अनुमान है कि इस तकनीकी निगरानी से खाद्यान्न परिवहन के मार्गों को 15 से 50 प्रतिशत तक अधिक कुशल बनाया जा सकेगा। इससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। साथ ही जरूरतमंद लोगों तक राशन समय पर पहुंच सकेगा।
इस योजना की आवश्यकता इसलिए भी महसूस की गई क्योंकि कई राज्यों को खाद्यान्न के आंतरिक परिवहन और वितरण में भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से लेकर जिला स्तर के डिपो और फिर राशन दुकानों तक अनाज पहुंचाने में बड़ी लागत आती है। SARTHAK-PDS के तहत केंद्र सरकार इन खर्चों में राज्यों को सहायता देगी, जिससे राज्य सरकारों के बजट पर बोझ कम होगा।
इसके अलावा यह योजना प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी बड़ी कल्याणकारी योजनाओं को और मजबूत बनाने में भी मदद करेगी। कोविड-19 महामारी के दौरान यह स्पष्ट हो गया था कि देश की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है। करोड़ों लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराने में PDS ने बड़ी भूमिका निभाई थी। अब सरकार चाहती है कि यह व्यवस्था भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पूरी तरह तैयार रहे।
हालांकि इस योजना को लेकर सभी पक्ष पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। राशन डीलरों के कुछ संगठनों का कहना है कि तकनीकी सुधार स्वागत योग्य हैं, लेकिन उनके लिए निर्धारित लाभांश और मार्जिन अभी भी पर्याप्त नहीं हैं। उनका तर्क है कि बढ़ती महंगाई, बिजली खर्च, डिजिटल उपकरणों के रखरखाव और अन्य परिचालन लागतों को देखते हुए राशन दुकानों को अधिक आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।
कुछ विशेषज्ञों ने डेटा गोपनीयता और डिजिटल निर्भरता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब करोड़ों लोगों का डेटा AI आधारित प्लेटफॉर्म पर संग्रहित होगा, तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी होगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की चुनौतियां भी मौजूद हैं, जिनका समाधान किए बिना तकनीकी सुधारों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
फिर भी अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की विशाल खाद्य वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक का उपयोग आवश्यक है। दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक वितरण नेटवर्क में से एक होने के कारण भारत के लिए यह जरूरी है कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ाने के नए तरीके अपनाए। यदि SARTHAK-PDS अपने उद्देश्यों में सफल होता है, तो यह केवल राशन वितरण की योजना नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े AI-संचालित सामाजिक कल्याण नेटवर्क में से एक बन सकता है।
सरल शब्दों में समझें तो सरकार अब राशन की दुकान को केवल अनाज वितरण केंद्र नहीं मान रही है। लक्ष्य यह है कि पूरे सिस्टम को डिजिटल तकनीक, AI और रियल-टाइम ट्रैकिंग से जोड़कर एक ऐसी राष्ट्रीय सप्लाई चेन बनाया जाए जहां हर बोरी का हिसाब हो, हर लाभार्थी की पहचान स्पष्ट हो और हर शिकायत का समाधान तेज़ी से हो सके। आने वाले वर्षों में SARTHAK-PDS यह तय करेगा कि भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पारंपरिक मॉडल से आगे बढ़कर तकनीक आधारित भविष्य की ओर कितनी तेजी से कदम बढ़ा सकती है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-05 17:39:50