Lalduhoma ने म्यांमार से लगातार आ रहे शरणार्थियों के बढ़ते बोझ को लेकर चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि म्यांमार में जारी अस्थिरता और संघर्ष के कारण बड़ी संख्या में लोग सुरक्षा और आश्रय की तलाश में मिजोरम पहुंच रहे हैं, जिससे राज्य के सीमित संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। मिजोरम और म्यांमार के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और जातीय संबंध लंबे समय से मौजूद हैं, जिसके चलते संकट के समय बड़ी संख्या में लोग सीमा पार कर राज्य में शरण लेते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मानवीय आधार पर प्रभावित लोगों की सहायता करने का प्रयास कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ती संख्या के कारण आवास, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, खाद्य आपूर्ति और प्रशासनिक प्रबंधन जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस मुद्दे पर सहयोग और दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। म्यांमार में राजनीतिक और सुरक्षा परिस्थितियों में बदलाव के बाद पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोग भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, विशेषकर मिजोरम, में पहुंचे हैं। राज्य सरकार समय-समय पर शरणार्थियों के लिए राहत और सहायता उपाय लागू करती रही है, लेकिन सीमित वित्तीय और प्रशासनिक संसाधनों के कारण स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक मानवीय मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा दृष्टि से भी महत्वपूर्ण विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय समुदायों ने मानवीय भावना के तहत शरणार्थियों की सहायता की है, लेकिन लंबे समय तक स्थिति जारी रहने पर राज्य की क्षमता पर प्रभाव पड़ सकता है। विश्लेषकों के अनुसार म्यांमार की स्थिति में स्थिरता आने तक पूर्वोत्तर भारत के सीमावर्ती राज्यों को इस चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। मिजोरम सरकार का मानना है कि इस विषय पर राज्य और केंद्र के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है ताकि मानवीय दायित्वों और स्थानीय संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। यह मुद्दा आने वाले समय में पूर्वोत्तर क्षेत्र की नीति और सीमा प्रबंधन से जुड़ी चर्चाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-06 16:37:42