by Dainikshamtak on | 2026-06-06 16:36:27
भारत सरकार ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने और देश के बॉन्ड बाजार को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों अर्थात जी-सेक में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को कर संबंधी राहत प्रदान करने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है। इस निर्णय का उद्देश्य भारतीय ऋण बाजार में वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में भारत की स्थिति को और मजबूत करना है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में भारत को प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल किए जाने के बाद विदेशी निवेश प्रवाह में वृद्धि की संभावना बनी है। ऐसे में कर संबंधी स्पष्टता और राहत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है। अध्यादेश के तहत पात्र विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से प्राप्त कुछ आय पर कर छूट प्रदान की जाएगी, जिससे निवेश की कुल लागत कम होगी और भारतीय बॉन्ड बाजार की आकर्षण क्षमता बढ़ेगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से दीर्घकालिक विदेशी पूंजी को प्रोत्साहन मिलेगा और सरकारी उधारी कार्यक्रम को भी समर्थन प्राप्त होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का सरकारी प्रतिभूति बाजार दुनिया के बड़े ऋण बाजारों में से एक है और इसमें विदेशी भागीदारी बढ़ने से बाजार की तरलता, मूल्य खोज प्रक्रिया और निवेशक आधार में विविधता आएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक निवेशक स्थिर और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास संभावनाएं, अपेक्षाकृत स्थिर वित्तीय प्रणाली और नीतिगत सुधार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विश्लेषकों के अनुसार अध्यादेश के माध्यम से दी गई कर राहत भारत को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में और अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है। आने वाले समय में इस निर्णय का प्रभाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, सरकारी बॉन्ड की मांग और समग्र वित्तीय बाजार गतिविधियों पर देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञ इसे भारतीय पूंजी बाजार के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
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by Dainikshamtak on | 2026-06-06 16:36:27
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