Piyush Goyal ने कहा है कि India ने वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक का सबसे अधिक सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Gross FDI) हासिल किया, जो 94.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इस आंकड़े को भारत की निवेश आकर्षण क्षमता, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक विनिर्माण रणनीति के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किसी देश की अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक पूंजी निवेश को दर्शाता है। इसमें विनिर्माण, सेवाएं, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों द्वारा किए गए निवेश शामिल होते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि हाल के वर्षों में India ने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स सुधार और विनिर्माण विस्तार जैसी नीतियों के माध्यम से वैश्विक निवेश आकर्षित करने पर विशेष जोर दिया है।
Piyush Goyal लंबे समय से भारत को वैश्विक विनिर्माण और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर जोर देते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक सप्लाई चेन पुनर्संतुलन और “China Plus One” रणनीति के कारण भी भारत को निवेश अवसर मिल रहे हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च FDI प्रवाह केवल पूंजी निवेश तक सीमित नहीं होता। इससे रोजगार, तकनीकी हस्तांतरण, निर्यात क्षमता और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि केवल निवेश घोषणाएं पर्याप्त नहीं होतीं। वास्तविक परियोजना कार्यान्वयन, नीति स्थिरता, भूमि उपलब्धता, न्यायिक प्रक्रिया और बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण कारक बने रहते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत का उच्च FDI आकर्षित करना अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के दीर्घकालिक भरोसे का संकेत माना जा सकता है।
सोशल मीडिया और उद्योग जगत में इस रिकॉर्ड FDI आंकड़े को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिली। कई लोगों ने इसे भारत की आर्थिक क्षमता और निवेश सुधारों का परिणाम बताया, जबकि कुछ विशेषज्ञों ने निवेश गुणवत्ता और रोजगार प्रभाव पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता जताई।
फिलहाल 94.5 बिलियन डॉलर का सकल FDI प्रवाह भारत की आर्थिक और औद्योगिक नीति चर्चाओं का प्रमुख विषय बना हुआ है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-27 20:49:44