India स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देते हुए इंडिजिनस MRI मशीन (IMRI) विकसित करने पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और डायग्नोस्टिक सेवाओं की लागत घटाना है। इस पहल से देश में चिकित्सा उपकरण निर्माण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
MRI (Magnetic Resonance Imaging) मशीनें वर्तमान में बड़े पैमाने पर आयात की जाती हैं, जिससे उनकी लागत अधिक रहती है और इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ता है। स्वदेशी IMRI के विकास से इन लागतों में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
सरकार और अनुसंधान संस्थान मिलकर इस परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिसमें उन्नत चिकित्सा तकनीक को स्थानीय स्तर पर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों के अनुरूप मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी आत्मनिर्भरता न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाएगी, बल्कि देश को मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी आगे बढ़ाएगी।
यदि यह परियोजना सफल होती है, तो इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सस्ती और बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा।
by Dainikshamtak on | 2026-04-25 14:03:08