राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं, विशेषकर Gen Z (जेनरेशन ज़ेड) को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि उन्हें आज की युवा पीढ़ी पर "पूरा भरोसा" है और केवल किसी विरोध प्रदर्शन (Protest) में भाग लेने से किसी व्यक्ति को राष्ट्रविरोधी (Anti-National) नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार, लोकतंत्र में युवाओं का सक्रिय होना और अपनी बात रखना स्वाभाविक है, लेकिन किसी भी आंदोलन या विरोध का मूल्यांकन उसके उद्देश्य, तरीके और तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। RSS प्रमुख ने कहा कि भारत का युवा वर्ग देश के भविष्य का आधार है और उनमें राष्ट्र निर्माण की अपार क्षमता है। उन्होंने यह भी कहा कि असहमति और विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें संविधान और कानून के दायरे में रहकर व्यक्त किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी युवा को केवल विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर राष्ट्रविरोधी करार देना उचित नहीं है। हाल के समय में देश में विभिन्न मुद्दों को लेकर छात्र और युवा संगठनों द्वारा कई प्रदर्शन किए गए हैं। इसी संदर्भ में भागवत की यह टिप्पणी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका बयान लोकतांत्रिक संवाद, युवाओं की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर व्यापक बहस को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों को शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, वहीं सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। RSS प्रमुख ने युवाओं से सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया। उनका कहना था कि भारत की प्रगति में युवा पीढ़ी की भूमिका निर्णायक है और समाज को उनके विचारों और ऊर्जा पर विश्वास रखना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में युवाओं की भागीदारी, सामाजिक आंदोलनों और लोकतांत्रिक विमर्श को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।
by Dainikshamtak on | 2026-08-07 22:30:04