भारत सरकार ने *Foreign Contribution (Regulation) Amendment Rules, 2026* अधिसूचित कर दिए हैं। इन नए नियमों के साथ विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के लिए अनुपालन (Compliance) की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत हो गई है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और विदेशी धन के उपयोग पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करना है, जबकि कई नागरिक समाज संगठनों का मानना है कि इससे छोटे NGOs के लिए काम करना अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
नए नियमों के अनुसार, अब केवल FCRA पंजीकरण (Registration) पर्याप्त नहीं होगा। किसी भी संगठन को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वह *किस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में और किस उद्देश्य के लिए विदेशी फंड का उपयोग करेगा*। यदि कोई संस्था बाद में किसी नए राज्य या गतिविधि में विस्तार करना चाहती है, तो उसके लिए अलग प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
FCRA लाइसेंस के नवीनीकरण (Renewal) के नियम भी बदले गए हैं। अब आवेदन करने वाले संगठन को यह दिखाना होगा कि उसने पिछले दो वित्तीय वर्षों में *कम से कम ₹10 लाख की विदेशी राशि स्वीकृत परियोजनाओं पर खर्च की है*। इस प्रावधान का उद्देश्य निष्क्रिय (Dormant) या केवल कागज़ों पर मौजूद संस्थाओं की पहचान करना बताया गया है।
इसके अलावा, विदेशी फंड लेने वाले संगठनों को अपनी *आधिकारिक वेबसाइट, सोशल मीडिया अकाउंट्स* और प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा प्रकाशित सार्वजनिक लेख, ब्लॉग या अन्य सार्वजनिक सामग्री की जानकारी भी देनी होगी। इससे नियामक एजेंसियों को संगठन की गतिविधियों और सार्वजनिक संचार पर बेहतर निगरानी रखने में मदद मिलेगी।
धार्मिक गतिविधियों से जुड़े प्रावधानों में भी स्पष्टता लाई गई है। नए नियमों के तहत धार्मिक कार्यों के लिए प्राप्त विदेशी फंड का उपयोग *धर्म परिवर्तन (Proselytisation)* या उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकेगा।
फंड जारी करने की प्रक्रिया भी अब अधिक सख्त होगी। किसी संगठन को अगली विदेशी फंडिंग की किश्त (Funding Tranche) तभी मिलेगी, जब वह पहले मिली राशि का *कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग* कर चुका हो और आवश्यक सत्यापन (Verification) प्रक्रिया पूरी हो जाए।
सरकार का कहना है कि इन नियमों से *मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने, विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकने और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने* में मदद मिलेगी। वहीं, कई नागरिक समाज संगठनों और NGO नेटवर्क्स का मानना है कि अतिरिक्त दस्तावेज़ीकरण, नए अनुपालन मानकों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण विशेष रूप से छोटे और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले संगठनों के लिए FCRA लाइसेंस बनाए रखना पहले से अधिक कठिन हो सकता है।
कुल मिलाकर, FCRA नियमों में यह संशोधन भारत में विदेशी फंडिंग के नियमन को और अधिक सख्त बनाता है। आने वाले समय में इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नए नियमों का क्रियान्वयन किस प्रकार होता है और विभिन्न सामाजिक संगठनों पर इसका व्यावहारिक असर कितना पड़ता है।
by Dainikshamtak on | 2026-08-06 22:24:25