मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़करबर्ग ने भारत की एक संसदीय समिति के समक्ष अपनी कंपनी के प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material - CSAM), डीपफेक (Deepfake) कंटेंट और अन्य परिचालन संबंधी कमियों को लेकर खेद व्यक्त किया और माफी मांगी। रिपोर्टों के अनुसार, संसदीय समिति के साथ हुई चर्चा के दौरान ज़करबर्ग ने स्वीकार किया कि इन गंभीर चुनौतियों से निपटना कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और Meta इस दिशा में अपनी प्रणालियों को लगातार मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी ने हानिकारक और अवैध सामग्री की पहचान करने, उसे हटाने और उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वचालित मॉडरेशन सिस्टम और मानव समीक्षा टीमों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसके अलावा, डीपफेक और भ्रामक सामग्री की पहचान के लिए भी नए तकनीकी उपाय विकसित किए जा रहे हैं। संसदीय समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा, डिजिटल गोपनीयता, फर्जी सामग्री और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर Meta से विस्तृत जवाब मांगे। समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि सोशल मीडिया कंपनियों को भारतीय कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पूरी तरह पालन करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित डीपफेक तकनीक और ऑनलाइन बाल सुरक्षा आज दुनिया भर की सरकारों और तकनीकी कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती बन चुके हैं। भारत में भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही, डेटा सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। मार्क ज़करबर्ग की यह माफी इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले समय में Meta द्वारा सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने तथा भारतीय नियामकों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर रहेगी।
by Dainikshamtak on | 2026-08-07 22:30:57