वर्ष 2025–26 के शैक्षणिक सत्र के दौरान भारत में प्रतिदिन औसतन 13 विद्यालय बंद होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में सबसे अधिक विद्यालय मध्य प्रदेश में बंद हुए, जो देशभर में हुए कुल स्कूल बंद होने के मामलों के आधे से अधिक बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार विद्यालयों के बंद होने के पीछे छात्र संख्या में कमी, संसाधनों का बेहतर उपयोग, स्कूलों के विलय, आधारभूत सुविधाओं का पुनर्गठन तथा शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक सुधार जैसे विभिन्न कारण बताए जा रहे हैं। कई राज्यों में कम नामांकन वाले विद्यालयों को निकटवर्ती बड़े विद्यालयों में समाहित करने की नीति अपनाई गई है, ताकि छात्रों को बेहतर शिक्षण सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। दूसरी ओर शिक्षा विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है कि यदि विद्यालयों के विलय या बंद होने के कारण छात्रों को लंबी दूरी तय करनी पड़े, तो इससे विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों, बालिकाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। उनका मानना है कि किसी भी पुनर्गठन प्रक्रिया में विद्यार्थियों की पहुंच, परिवहन सुविधा, शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यालय छोड़ने की दर जैसे पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार और अन्य राज्य सरकारों का कहना है कि विद्यालयों के पुनर्गठन का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। सरकारों के अनुसार बड़े और संसाधन-संपन्न विद्यालयों में छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है। हालांकि इस विषय पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नीतियां लागू हैं और कई स्थानों पर अभिभावकों तथा स्थानीय समुदायों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा सुधार और विद्यालय पुनर्गठन की किसी भी प्रक्रिया का अंतिम उद्देश्य छात्रों को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना होना चाहिए। आने वाले समय में इस विषय पर राज्य सरकारों और शिक्षा विभागों की ओर से और विस्तृत जानकारी तथा नीतिगत निर्णय सामने आने की संभावना है।
by Dainikshamtak on | 2026-07-14 00:21:50