कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत के पर्यटन क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश को वैश्विक पर्यटन प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रचार अभियानों पर निर्भर रहने के बजाय बुनियादी ढांचे, कर प्रोत्साहनों और निवेश अनुकूल नीतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बैंकॉक को एक महीने में जितने पर्यटक मिलते हैं, भारत को पूरे वर्ष में उससे तुलनीय संख्या में पर्यटक प्राप्त होते हैं। थरूर ने यह भी कहा कि प्रति व्यक्ति आय अधिक होने के बावजूद थाईलैंड कई मामलों में विदेशी पर्यटकों के लिए भारत की तुलना में अधिक किफायती गंतव्य माना जाता है। उनके अनुसार पर्यटन क्षेत्र की दीर्घकालिक वृद्धि के लिए सरकार की भूमिका मुख्य रूप से अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने, परिवहन संपर्क बेहतर बनाने, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने तथा निवेश आकर्षित करने तक सीमित होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को वैश्विक पर्यटन बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को और प्रोत्साहित करना चाहिए। थरूर का मानना है कि निजी कंपनियां, होटल उद्योग, ट्रैवल प्लेटफॉर्म और स्थानीय पर्यटन व्यवसाय देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं। भारत विश्व की सबसे विविध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासतों वाले देशों में शामिल है। देश में हिमालयी क्षेत्र, समुद्र तट, वन्यजीव अभयारण्य, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक स्मारक और सांस्कृतिक पर्यटन की विशाल संभावनाएं मौजूद हैं। इसके बावजूद विशेषज्ञ लंबे समय से यह चर्चा करते रहे हैं कि पर्यटन क्षमता के अनुपात में भारत को विदेशी पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि की आवश्यकता है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार पर्यटन क्षेत्र रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा अर्जन और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। हाल के वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने पर्यटन अवसंरचना, हवाई संपर्क और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर कई पहल की हैं। थरूर की टिप्पणी ने एक बार फिर इस बहस को चर्चा में ला दिया है कि भारत को पर्यटन क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए किन नीतिगत और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-06-20 18:50:00