भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रौद्योगिकियों की बढ़ती मांग के बीच देश के एआई डेटा सेंटरों में अगले पांच वर्षों के दौरान लगभग 7 लाख ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट यानी GPU तैनात किए जाने की संभावना जताई गई है। यह अनुमान भारत की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था, क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और जनरेटिव एआई अनुप्रयोगों की बढ़ती जरूरतों को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार GPU आधुनिक एआई प्रणालियों की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि ये बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग और जटिल गणनाओं को तेज गति से संचालित करने में सक्षम होते हैं। भारत में एआई अपनाने की गति बढ़ने के साथ-साथ डेटा सेंटर उद्योग भी तेजी से विस्तार कर रहा है। सरकारी पहल, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र और तकनीकी निवेश के कारण देश वैश्विक एआई विकास के प्रमुख केंद्रों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार आने वाले वर्षों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत में एआई कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश कर सकती हैं। इससे डेटा सेंटर अवसंरचना, ऊर्जा प्रबंधन, क्लाउड सेवाओं और उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई डेटा सेंटरों में GPU की बढ़ती तैनाती स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, विनिर्माण, कृषि और रक्षा जैसे क्षेत्रों में उन्नत एआई समाधानों के विकास को गति दे सकती है। साथ ही यह भारत की डिजिटल आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूत करेगी। हालांकि इस विस्तार के साथ ऊर्जा खपत, डेटा सुरक्षा, चिप आपूर्ति और कुशल मानव संसाधन जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा। विश्लेषकों के अनुसार यदि अनुमानित स्तर पर GPU तैनाती होती है तो भारत एआई कंप्यूटिंग क्षमता के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। यह विकास देश के तकनीकी भविष्य, नवाचार क्षमता और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-30 15:52:47