Reserve Bank of India द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार 22 मई को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.511 अरब डॉलर घटकर 681.384 अरब डॉलर रह गया है। इससे पिछले सप्ताह देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 688.895 अरब डॉलर के स्तर पर था। भारतीय रिजर्व बैंक के साप्ताहिक सांख्यिकीय आंकड़ों में बताया गया कि इस गिरावट का प्रमुख कारण विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में कमी और स्वर्ण भंडार के मूल्य में उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक स्थिरता, आयात क्षमता और मुद्रा विनिमय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में आरक्षित स्थिति शामिल होती है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में उतार-चढ़ाव तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय परिस्थितियों का असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार पड़ रहा है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में हालिया गिरावट के बावजूद यह स्तर ऐतिहासिक रूप से काफी मजबूत माना जा रहा है और इससे देश की आयात जरूरतों को कई महीनों तक पूरा करने की क्षमता बनी हुई है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय रुपये को स्थिर बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हाल के महीनों में भारतीय रिजर्व बैंक ने विनिमय दर में अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप भी किया है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुआ है और इसे वैश्विक निवेशकों के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेतक के रूप में भी देखा जाता है। आने वाले सप्ताहों में वैश्विक बाजार की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह के आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
by Dainikshamtak on | 2026-05-30 01:06:14