भारत FY27 में 35,000 करोड़ रुपये के हाईवे परिसंपत्ति मुद्रीकरण की तैयारी में

भारत FY27 में 35,000 करोड़ रुपये के हाईवे परिसंपत्ति मुद्रीकरण की तैयारी में

भारत सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 35,000 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय राजमार्ग परिसंपत्ति मुद्रीकरण (Highway Asset Monetisation) की योजना पर काम कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य मौजूदा राजमार्ग परिसंपत्तियों से पूंजी जुटाकर नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए निवेश क्षमता बढ़ाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रणनीति भारत के दीर्घकालिक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि परिसंपत्ति मुद्रीकरण मॉडल के तहत सरकार पहले से निर्मित और राजस्व उत्पन्न करने वाले राजमार्गों को निजी या संस्थागत निवेशकों के साथ दीर्घकालिक परिचालन समझौतों के माध्यम से उपयोग में लाती है। इसके बदले सरकार को अग्रिम पूंजी प्राप्त होती है, जिसे नई परियोजनाओं और बुनियादी ढांचा विकास में लगाया जा सकता है।

भारत हाल के वर्षों में सड़क और राजमार्ग नेटवर्क विस्तार पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है। सरकार एक्सप्रेसवे, आर्थिक कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, तेज सड़क संपर्क आर्थिक गतिविधियों, माल परिवहन और क्षेत्रीय विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे बड़े विकासशील देश के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में परिसंपत्ति मुद्रीकरण को सरकारी पूंजी उपयोग दक्षता बढ़ाने के उपकरण के रूप में देखा जाता है। इससे सरकार को नई परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि परिसंपत्ति मुद्रीकरण मॉडल में पारदर्शिता, उचित मूल्यांकन और सेवा गुणवत्ता बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। यदि नियामकीय निगरानी मजबूत न हो, तो उपयोगकर्ताओं पर टोल और परिचालन गुणवत्ता से जुड़े सवाल उठ सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क लगातार विस्तारित हो रहा है और निजी निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है। पेंशन फंड, इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और वैश्विक निवेशक लंबे समय तक स्थिर रिटर्न देने वाली सड़क परिसंपत्तियों में निवेश को आकर्षक मानते हैं।

सरकार पहले भी टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (TOT) और InvIT जैसे मॉडलों के माध्यम से राजमार्ग परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की दिशा में कदम उठा चुकी है। विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में इस मॉडल का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल प्रस्तावित 35,000 करोड़ रुपये की राजमार्ग परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना को भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग और आर्थिक विकास रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

by Dainikshamtak on | 2026-05-18 13:37:17

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